नई शिक्षा नीति: पांच वर्षो में 15 करोड़ छात्र बनेंगे हुनरमंद, व्यावसायिक शिक्षा से छात्रों को जोड़ने का विस्तृत खाका तैयार

नई शिक्षा नीति: पांच वर्षो में 15 करोड़ छात्र बनेंगे हुनरमंद, व्यावसायिक शिक्षा से छात्रों को जोड़ने का विस्तृत खाका तैयार

 नई दिल्ली : स्कूलों और कॉलेजों से पढ़कर निकलने वाले युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय ने एक विस्तृत खाका तैयार किया है। इसमें श्रम, उद्योग और कौशल विकास जैसे मंत्रलय को भी शामिल किया गया है। इसके तहत अगले पांच वर्षो में स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 15 करोड़ छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की तैयारी है। फिलहाल राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कौशल योग्यता फ्रेमवर्क तैयार करने पर काम शुरू भी कर दिया है।


नई शिक्षा नीति के अमल में तेजी से जुटे शिक्षा मंत्रलय का सबसे ज्यादा ध्यान स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने का है। वैसे भी मौजूदा समय में देश के स्कूल-कॉलेजों में 30 करोड़ से ज्यादा छात्र पढ़ रहे है। ऐसे में सबको नौकरी मिलना संभव नहीं है। सरकार की कोशिश है कि यदि उन्हें उनकी रुचि के मुताबिक किसी व्यवसाय से जोड़ दिया जाए, तो वे आगे चलकर इसे अपने रोजगार का साधन बना सकेंगे। मौजूदा समय में देश में व्यावसायिक शिक्षा लेने वालों का आंकड़ा सिर्फ पांच से सात फीसद तक ही है। इनमें इंजीनियरिंग या दूसरे तकनीकी कोर्स करने वाले छात्र भी शामिल हैं। सरकार की योजना इसे बढ़ाकर 50 फीसद तक पहुंचाने की है। इसे लेकर पूरी योजना पर काम किया जा रहा है। व्यावसायिक शिक्षा की यह पढ़ाई स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा तक एक साथ ही शुरू होगी। साथ ही इनमें शैक्षणिक कोर्सो की तरह छात्रों को आगे भी पढ़ाई करने का विकल्प दिया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा से सभी छात्रों को जोड़ने के इस रोडमैप को लेकर संबंधित मंत्रलयों के अलावा उद्योग जगत से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों और व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों के साथ मिलकर काम शुरूकर दिया गया है।

मंत्रलय ने इस बीच व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित नेशनल कमेटी फॉर द इंटीग्रेशन ऑफ वोकेशनल एजुकेशन (एनसीआइवीई) के गठन को लेकर भी काम शुरू कर दिया है। इसे लेकर संबंधित मंत्रलयों और उद्योग जगत के विशेषज्ञों से राय मांगी गई है। खास बात यह है कि इस कमेटी के सुझाव के आधार पर भविष्य में भी व्यावसायिक शिक्षा का स्वरूप तय किया जाएगा, ताकि इस शिक्षा की उपयोगिता बनी रहे।