सपा सत्ता में आई तो शिक्षामित्रों को दिया जाएगा शिक्षक का दर्जा, सपा प्रदेश अध्यक्ष उत्तम पटेल ने बेरोजगारी, शिक्षकों की समस्याओं सहित अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरा

सपा सत्ता में आई तो शिक्षामित्रों को दिया जाएगा शिक्षक का दर्जा, सपा प्रदेश अध्यक्ष उत्तम पटेल ने बेरोजगारी, शिक्षकों की समस्याओं सहित अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरा

 अयोध्या। समाजवादी पार्टी ने 1.72 लाख शिक्षामित्रों को 35 सौ रुपए मानदेय से 35 हजार रुपये मासिक वेतन देकर शिक्षक बनाया था, लेकिन भाजपा ने उनके साथ अन्याय किया। जिसका नतीजा रहा कि चार वर्ष के भीतर बहुत से शिक्षामित्रों ने जीवन लीला समाप्त कर लिया, फिर भी सरकार ने उनके परिवारों का भी ध्यान नहीं दिया। सपा सरकार आने पर समान कार्य-समान वेतन के फार्मूले के तहत शिक्षामित्रों को पुन: शिक्षक का दर्जा दिया जाएगा। यह बातें सोमवार को अयोध्या पहुंचे सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने सिविल लाइन स्थित एक होटल में प्रेसवार्ता में कही।


प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार के कार्य व्यवहार से शिक्षक व शिक्षित वर्ग नाराज है। भाजपा ने प्रतिवर्ष दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, जिसका पता नहीं है। केंद्र के सात वर्ष व राज्य सरकार के चार वर्ष के कार्यकाल में बेरोजगारी चरम पर है। कहा कि शिक्षकों को सपना दिखाकर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। 3.5 लाख वित्तविहीन शिक्षकों को सपा सरकार ने 32 पुरानी मांग स्वीकृत करते हुए मानदेय देना शुरू किया, जिसे भाजपा ने बंद कर दिया। तदर्थ शिक्षकों का विनयिमतीकरण नहीं किया गया। विभागों में छंटनी चल रही है। लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है।
कोरोना महामारी में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 21 दिन के भीतर कोरोना भगाने की बात कही थी, आज नौ महीने बीतने को हैं तो कोरोना के दूसरे चरण की शुरुआत की बात कही जा रही है। महामारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कहा कि कोरोना के नाम पर लूट चल रही है। प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए 21 लाख करोड़ के राहत पैकेज में प्रदेश को क्या मिला, इसकी जानकारी नहीं है। विधायक, सांसद, एमएलसी आदि की निधि, वेतन की कटौती की गई, उद्योगपतियों, सामाजिक संस्थाओं से आपदा के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन उनका उपयोग कहा हुआ। कहा कि अस्पतालों की हालत खराब है। सरकार की गलत नीतियों के कारण नॉन कोविड मरीजों को परेशानियां उठानी पड़ी। विधायकों से विकास का पैसा भी महामारी के कारण ले लिया गया, लेकिन पैसा कहां गया, इसकी जानकारी नहीं है। सदन में भी इससे संबंधित सवाल किए गए, जिसका जवाब भी विपक्ष को नहीं दिया गया। किसानों का दर्द बयां करते हुए कहा कि गन्ने के मूल्य का निर्धारण करना तो दूर सरकार बीते वर्ष का 14 हजार करोड़ रुपये का भुगतान चीनी मिलों से नहीं करा सकी है। किसानों को लाभकारी मूल्य मिलना तो दूर लागत मूल्य निकालना मुश्किल हो रहा है। कहा कि सपा सरकार आने पर पुरानी पेंशन बहाली के लिए प्रयास किया जाएगा, तदर्थ शिक्षकों का विनियमतीकरण व शिक्षामित्रों को शिक्षक का दर्जा दिया जाएगा। किसानों की जमीन अधिग्रहण में उचित मुआवजा देकर उन्हें लाभान्वित किया जाएगा। इस दौरान पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय, जिलाध्यक्ष गंगा सिंह यादव, महानगर अध्यक्ष श्यामकृष्ण श्रीवास्तव, बख्तियार खान, बलराम यादव, मनोज जायसवाल, मो. कमर राइन, सरोज यादव, इंद्रपाल यादव, छोटेलाल यादव आदि मौजूद रहे।